राष्ट्रीय ज्ञान आयोग
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फोकस एरिया | भाषा

भाषा

भारत जैसे बहुभाषी देश में भाषा न सिर्फ सिखाने या बातचीत करने के माध्यम के रूप में महत्वपूर्ण है, बल्कि ज्ञान और विभिन्न सेवाओं की सुलभता निश्चित करने में भी इसकी प्रमुख भूमिका है। मौजूदा स्थिति में अंग्रेजी भाषा की समझ और उस पर मज़बूत पकड़ शायद उच्च शिक्षा, रोजगार की सँभावनाओं और सामाजिक अवसरों की सुलभता तय करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। स्कूल छोड़ने वाले जो बच्चे अंग्रेजी भाषा में पूरी तरह दक्ष नहीं होते, वे हमेशा उच्च शिक्षा के मामले में पिछड़े रहते हैं। जिन्हें अंग्रेजी अच्छी तरह से नहीं आती उन्हें हमारे प्रमुख शिक्षाण संस्थानों में दाखिला पाने के लिए मुकाबला करने में बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। काम की दुनिया में, न सिर्फ पेशेवर व्यवसायों में बल्कि साधारण नौकरियों में भी ये मुश्किलें और बढ़ जाती हैं।

इस संदर्भ में राष्ट्रीय ज्ञान आयोग ने सरकार, शिक्षा संस्थाओं, #2350;ीडिया और उद्योग में विभिन्न व्यक्तियों के साथ इस विषय पर अनौपचारिक विचार-विमर्श किया है। कुछ राज्यों के मुख्यमंत्रियों और संसद सदस्यों के साथ चर्चा की गई है। आयोग ने चिकित्सा और विधि विशेषज्ञों के साथ और सामाजिक संगठनों के साथ भी विचार-विमर्श किया है। आयोग ने शिक्षा के सभी स्तरों पर अंग्रेजी भाषा की पढ़ाई कराने के तौर-तरीके तय करने के लिए  एक कार्य दल गठित किया था। इस कार्य दल की रिपोर्ट और व्यापक विचार-विमर्श के आधार पर राष्ट्रीय ज्ञान आयोग ने अपनी सिफारिशें दी हैं। यह सिफारिशें मोटेतौर पर पहली कक्षा से स्कूल में अंग्रेजी भाषा की पढ़ाई शुरू करने, शिक्षक प्रशिक्षण, उपयोगी पुस्तकों, भाषा सिखाने और भाषा पढ़ाने और पढ़ने के लिए (शिक्षक और सामग्री दोनों तरह से ) संसाधन प्रदान करने के तौर-तरीकों से जुड़ी हुई हैं।


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