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फोकस एरिया | ई-प्रशासन

ई-प्रशासन

ई-प्रशासन शासन के साथ नागरिकों के सम्पर्क के विभिन्न बिन्दुओं को सरल बनाया जा सकता है। इसकी मदद से सेवाओं को तेजी से प्रदान किया जा सकता है, उनकी उत्पादकता और प्रभावशीलता को बढ़ाया जा सकता है, उन्हें नागरिक केन्द्रित बनाया जा सकता है, और यह भी ध्यान रखा जा सकता है कि उनके लाभ सही लोगों को मिले।

ई-प्रशासन के कुछ लाभ इस प्रकार है:
  • सार्वजनिक सेवाओं की लागत में कमी और पहुँच तथा क्वालिटी में सुधार;
  • लेन-देन की लागत और लेन-देन के समय में कमी;
  • नागरिकों को सशक्त बनाना और सरकारी कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाना;
  • प्रक्रियाओं के तौर-तरीकों में फेरबदल करके कार्यकुशलता और उत्पादकता बढ़ाना।
केन्द्र और राज्य सरकारों के स्तर पर विभिन्न ई-प्रशासन प्रयासों की समीक्षा और लंबी चर्चाओं के बाद राष्ट्रीय ज्ञान आयोग ने ई-प्रशासन का अध्ययन करने के लिए एक विशेष दल का गठन किया। इस दल की रिपोर्ट पर योजना आयोग में चर्चा की गई। फिर इसे संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री के सामने प्रस्तुत किया गया। उसके बाद प्रशासनिक सुधार आयोग सहित अन्य हितधारकों के साथ अनेक बार चर्चा की गई। इन चर्चाओं के आधार पर राष्ट्रीय ज्ञान आयोग ने जनवरी 2006 में ई-प्रशासन के बारे में अपनी सिफारिशें प्रधानमंत्री को भेज दीं और मई, 2006 में उन्हें जनता के सामने रख दिया।

आयोग की रिपोर्ट में इस बात को दोहराया गया है कि ई-प्रशासन का संबंध सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना टैक्नॉलॉजी और बुनियादी ढाँचे से नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक सुधारों को साकार करने का एक शानदार अवसर है। ई-प्रशासन के बारे में आयोग की सिफारिशें मोटेतौर पर प्रक्रियाओं और मानकों, बुनियादी ढाँचे और संगठन से जुड़ी हैं। उनमें निम्नलिखित बातों की ज़रूरत पर जोर दिया गया है:
  • सबसे पहले सरकारी प्रक्रियाओं में फेरबदल करना, जिससे प्रशासन की बुनियादी तौर-तरीकाेंं को सरल, पारदर्शी, सार्थक और कार्यकुशल बनाया जाए।
  • ऐसी 10-20 महत्वपूर्ण सेवाओं का चुनाव करना, जो जबर्दस्त बदलाव ला सकती हैं, उन्हें सरल बनाना और वेब आधारित सेवाओं के रूप में लोगों को सुलभ कराना।
  • साझे मानक विकसित करना और ई-प्रशासन के लिए साझा मंच/ बुनियादी ढाँचा सुलभ कराना।
  • एकदम नए राष्ट्रीय कार्यक्रम (जैसे, भारत निर्माण, ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना आदि) शुरू करना, सुव्यवस्थित प्रशासनिक तंत्र और वेब संपर्क के जरिए उन पर अमल करना।
राष्ट्रीय स्तर पर ई-प्रशासन की सफलता के लिए एक ऐसा उपयुक्त केन्द्रीय संगठन बनाना ज़रूरी है, जिसकी विभिन्न शाखाएँ पूरी स्वायत्ता और जवाबदेही के साथ मिशन के रूप में काम कर सकें। राष्ट्रीय ई-प्रशासन कार्यक्रम को तीन से पाँच वर्ष के भीतर लागू करने के लिए सरकारी प्रक्रियाओं में फेरबदल, स्वायत्ता, लचीलेपन, उद्देश्य की स्पष्टता पहले से निश्चित हासिल किए जा सकने वाले और नापे जा सकने लायक लक्ष्य तथा समय-समय पर निगरानी से जुड़े संगठनात्मक मुद्दों पर ध्यान देना आवश्यक है।


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