राष्ट्रीय ज्ञान आयोग
भारत सरकार
  


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राष्ट्र के नाम प्रतिवेदन 2006 - 2009

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परिचय | विचारणीय विषय और उद्देश्य

विचाराणीय विषय

13 जून को जारी सरकारी अधिसूचना के अनुसार राष्ट्रीय ज्ञान आयोग के विचारणीय विषय इस प्रकार हैं:

  • शिक्षा व्यवस्था में उत्कृष्टता लाना ताकि वह 21वीं शताब्दी में ज्ञान की चुनौतियों का सामना कर सके और ज्ञान के क्षेत्रों में भारत की स्पर्धा लेने की क्षमता बढ़ा सके।

  • विज्ञान और टैक्नॉलॉजी प्रयोगशालाओं में ज्ञान की रचना को बढ़ावा देना।

  • बौध्दिक संपदा अधिकारों से जुड़े संस्थाओं का प्रबंधन सुधारना।

  • खेती और उद्योग में ज्ञान के उपयोग को बढ़ावा देना।

  • सरकार को नागरिकों के लिए असरदार, पारदर्शी और जवाबदेह सेवा प्रदान करने वाली संस्था का रूप देने में ज्ञान क्षमताओं के उपयोग को बढ़ावा देना और लोगों को अधिक-से-अधिक लाभ पहुँचाने के लिए ज्ञान के व्यापक प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देना।


उद्देश्य

राष्ट्रीय ज्ञान आयोग का पहला उद्देश्य भारत को एक जोशीला ज्ञान आधारित समाज बनाना है। इसके लिए ज्ञान की मौजूदा प्रणालियों में बड़े पैमाने पर सुधार करने के साथ-साथ नए प्रकार के ज्ञान की रचना के लिए रास्ते तैयार करने होंगे।

ज्ञान की रचना में समाज के सभी वर्गों की भागीदारी बढ़ाना और ज्ञान को सबके लिए समान रूप से सुलभ बनाना भी इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए महत्वपूर्ण है।

इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय ज्ञान आयोग उपयुक्त संस्थागत ढाँचा विकसित करना चाहता है जिससे

  • शिक्षा व्यवस्था को मज़बूती मिले, देश के भीतर अनुसंधान और अभिनव प्रयासों को बढ़ावा मिले तथा स्वास्थ्य, खेती और उद्योग जैसे क्षेत्रों में इस ज्ञान का आसानी से उपयोग किया जा सके।

  • प्रशासन और संपर्क यानि कनेक्टिविटी को बढ़ाने के लिए सूचना और संचार तकनीकों का इस्तेमाल किया जाए।

  • दुनिया भर में ज्ञान प्रणालियों के बीच सम्पर्क और आदान-प्रदान का तंत्र स्थापित हो सके।